how to adopt a child बच्चे को गोद कैसे लें

हमारे देश में किसी भी बच्चे को गोद लेने से पहले कानूनी प्रक्रिया पूर्ण करनी होती है। इसके बाद ही बच्चे को गोद लिया जा सकता है। बच्चे को गोद लेना उत्तरदायित्व के हस्तांतरण से जुड़ा मामला है। बच्चे के अधिकार भी सुरक्षित रहना चाहिए इसलिए इसे कानूनी प्रक्रिया से किया जाना आवश्यक है। कानूनी जानकारी के अभाव में कई लोग रुपयों का लेन-देन करके बच्चा गिरोहों से या गैर पंजीकृत संस्थाओं से बच्चों को खरीद लेते हैं यह पूर्णतः गैर कानूनी है।  गोद लेने की प्रक्रिया अन्य देशों की तुलना में कम है। लेकिन कुछ समय से सकारात्मक बदलाव जरुर आया है। जिससे बेसहारा बच्चों को सहारा मिल रहा है। किशोर न्याय (बालकों की देखरेख और संरक्षण) अधिनियम 2015 जोकि जनवरी 2016 से लागू हुआ है इस अधिनियम के बाद किसी भी धर्म, जाति के लोग बच्चे को वैधानिक प्रक्रिया अनुसार गोद ले सकते हैं। हालांकि हिंदुओं के लिए हिंदु एडाॅप्शन व मेंटनेंस एक्ट 1956 लागू है। 

वर्तमान कोरोनाकाल में कई बच्चे अनाथ हुए हैं। ऐसे में कई गैर सरकारी संगठन, समूह आदि बच्चों को गोद लेने देने की मुहिम चला रहे हैं जोकि अवैधानिक है। बच्चे को गोद वैधानिक प्रक्रिया अनुसार ही लिया जा सकता और दिया जा सकता है। जिसके लिए केंद्र सरकार ने सेंट्रल अडाॅपशन, रिसोर्स अथाॅरिटी, CARA का गठन किया है। इसकी देखरेख में ही गोद लेने की प्रक्रिया पूर्ण होती है। यह केंद्रीय एजेंसी अनाथ, त्यागे हुए बच्चों के लिए परिवार ढूंढ़ती है। गोद लेने वालों की आर्थिक स्थिति देखी जाती है, वे बच्चे को गोद ले पाने में समर्थ हैं या नहीं यह परखा जाता है इसके बाद गोद लेने या एडाॅप्शन की प्रक्रिया पूर्ण होती है। गोद ले वालों को कानूनी प्रक्रिया के अनुसार बाउंड किया जाता है। 

जिला मजिस्ट्रेट को भी गोद लेने के आदेश जारी करने के लिए अधिकृत किया

किशोर न्याय (बालकों की देखरेख और संरक्षण) अधिनियम में मार्च 2021 में केंद्र सरकार ने संशोधन भी किया गया है। इन संशोधनों को लोकभा में 24 मार्च 2021 को पारित कर दिया गया है। इस अधिनियम की धारा 61 के अनुसार अतिरिक्त जिला मजिस्टेªट और जिला मजिस्टेट को भी गोद लेने के आदेश जारी करने के लिए अधिकृत किया गया है। ताकि गोद लेने वाले मामलों का त्वरित निपटारा हो सके। गोद लेने के मामलों में हो रहे विलंब से गोद लेने वाले हतोत्साहित भी हो रहे थे इसको देखते हुए सरकार ने यह निर्णय लिया है। इस संशोधन के अनुसार किसी भी बाल देखभाल संस्थान को जिला मजिस्ट्रेट की सिफारिशों पर विचार करने के बाद ही पंजीकृत किया जाएगा। जिला मजिस्ट्रेट स्वतंत्र रूप से जिला बाल संरक्षण इकाइयों, बाल कल्याण समितियों, किशोर न्याय बोर्डों, विशेष किशोर पुलिस इकाइयों, बाल देखभाल संस्थानों आदि के कामकाज का मूल्यांकन कर सकेंगे। 

इस अधिनियम के अनुसार किसी भी धर्म के लोग एडाॅप्शन कर सकते हैं। 

Hindu Adoption and Maintenance Act 1956 is applicable for Hindus.

हिंदुओं के लिए हिंदु एडाॅप्शन व मेंटनेंस एक्ट 1956 लागू है 

हिंदु एडाॅप्शन व मेंटनेंस एक्ट 1956 में तो गोद लेने की प्रक्रिया का उल्लेख है लेकिन मुस्लिम और ईसाइयों के लिए अलग से प्रावधान नहीं थे इस अधिनियम के बाद किसी भी धर्म के लोग बच्चे को गोद ले सकते हैं। हिंदू एडॉप्शन मेंटेनेंस एक्ट 1956 के तहत हिन्दू धर्म के लोग एडॉप्शन कर सकते हैं। यह एक्ट सिर्फ 15 साल की उम्र तक के बच्चों को गोद लेने की अनुमति देता है और यह सिर्फ हिन्दुओं पर ही लागू होता है। इसलिए हिंदु धर्म के अनुयायी इस कानून के अनुसार अनुसार भी गोद लेने की पूरी कर सकते हैं। इस अधिनियम के अनुसार भी गोद लेने वाला व्यक्ति स्वस्थ्य मस्तिष्क का एवं सक्षम होना चाहिए। गोद लेने के पहले पत्नी की सहमति आवश्यक है। अधिनियम के तहत बच्चे के माता-पिता या संरक्षक ही बच्चे को गोद देने हेतु सक्षम हैं। अधिनियम के अनुसार माता-पिता से तात्पर्य जन्म देने वालों से है। इस अधिनियम के अंतर्गत गोद लेने वाला बच्चे से आयु में 21 वर्ष बड़ा होना चाहिए। 

apply on CARA website :-

CARA की वेबसाइट पर आवेदन कर सकते हैं :-

बच्चा गोद लेने के इच्छुक लोग केंद्रीय दत्तक ग्रहण संसाधन प्राधिकरण (ब्।त्।) की वेबसाइट बंतपदहेण्दपबण्पद पर आवेदन करत सकते हैं। पंजीयन फार्म के साथ आवश्यक दस्तावेज वेबसाइट पर अपलोड करने होंगे (दस्तावेजों की सूची नीचे पृथक से दी गई है)। आवेदन का अपडेट नियमित रुप से वेबसाट पर चेक किया जा सकता है। किस लिंग के बच्चे को आप गोद लेना चाहते हैं उसका चयन कर सकते हैं। देश के किस राज्य से आप बच्चा लेना चाहते हैं या देश के किसी भी राज्य का बच्चा गोद लेने के इच्छुक हों तो उसका आप्शन भी बेवसाइट पर उपलब्ध है। कारा से जुड़ी उस क्षेत्र की संस्थाओं में से किसी का चयन करना होगा। कारा से जुड़ी मान्यताप्राप्त संस्थाएं बच्चा आने के बाद जानकारी ब्।त्। की साइट पर डाल देते हैं। पंजीयन के आधार पर सबसे पहले एप्लाई करने वाले व्यक्ति से संपर्क किया जाता है और वैधानिक प्रक्रिया के अनुसार बच्चा दंपती को गोद दिया जाता है। कारा की टीम सारी जानकारी की खुद पड़ताल करती है। दोनों पक्ष सब रजिस्टरार के यहां स्टांप पेपर पर डीड तैयार करवाते हैं जिस पर दो गवाहों के हस्ताक्षर होते हैं इसके बाद बच्चे को सभी कानूनी अधिकार मिल जाते हैं। बच्चे की मेडीकल रिपोर्ट आदि भी पेरेंट्स को बताई जाती है। 

48 hours to respond

बच्चे की जानकारी साझा करके जबाव के लिए 48 घंटे का समय दिया जाता है:-

बच्चे के संबंध में सारी जानकारी पेरेंट्स को दी जाती है। जबाव देने के लिए 48 घंटे का समय दिया जाता है। यदि पेरेंट्स तैयार हो जाते हैं तो 20 दिनों के अंदर पेरेंट्स को बुलाकर एडाॅप्शन कमेटी की मीटिंग जिसमें डिस्ट्रिक्ट चाइल्ड प्रोटेक्शन आफिसर आवश्यक रुप से उपस्थित होते हैं। संबंधित संस्था की मैनेजिंग कमेटी के सदस्य संभावित पेंरेंट्स के डाक्यूमेंट्स का वेरीफिकेशन करते हैं। यदि एडाॅप्शन कमेटी पास करती है तो बच्चा दिया जाता है। संभावित पेरेंट्स को बच्चे स्वास्थ्य परीक्षण का भी अधिकार दिया जाता है। जिससे बाद में कोई दिक्कत सामने नहीं आएं। स्वास्थ्य परीक्षण के बाद यदि बच्चे के स्वास्थ्य को लेकर यदि संभावित पेरेंट्स असंतुष्ट होते हैं तो वे बच्चा गोद लेने से इंकार भी कर सकते हैं। 

Documents required for adoption:-

गोद लेने के लिए जरूरी दस्तावेज:-

  1. दत्तक पेरेंट्स का पहचान का प्रमाण (आधार कार्ड,मतदाता कार्ड, पैन कार्ड, पासपोर्ट,ड्राइविंग लाइसेंस)
  2. माता-पिता के जन्म प्रमाण पत्र
  3. आय का प्रमाण
  4. माता-पिता की फिटनेस का प्रमाणपत्र
  5. निवास का प्रमाण
  6. पारिवारिक फोटोग्राफ
  7. शादी का प्रमाण पत्र
  8. अगर गोद लेने वाला सिंगल पेरेंट है, तो कोई दुर्घटना हो जाने की स्थिति में बच्चे की देखभाल करने के लिए एक रिश्तेदार की सहमति।
  9. ऐसे दो व्यक्तियों के सिफारिशी पत्र, जो परिवार को अच्छी तरह से जानते हैं (करीबी रिश्तेदार नहीं होने चाहिए)

These points are investigated

इन बिंदुओं पर होती है पड़ताल 

  1. दंपत्ति बच्चे को गोद क्यों लेना चाहते हैं, उनका उद्देश्य क्या है।
  2. वयस्क व स्वस्थ्य मस्तिष्क का व्यक्ति ही बच्चा गोद लेने के योग्य है। 
  3. गोद वाले पेरेंट्स किस आयु वर्ग के हैं। 
  4. गोद लेने वाले सक्षम हैं या नहीं, उनका पारिवारिक और सामाजिक बैकग्राउंड।
  5. एडाॅप्शन के बाद भी यह देखा जाता है बच्चा ठीक से रह पा रहा है या नहीं उसका शोषण तो नहीं हो रहा है। 
  6. यदि गोद लेने के इच्छुक व्यक्ति के बेटा या पोता है तो वह लड़का गोद नहीं ले सकता है। 
  7. मां या बाप में से किसी एक को भी ऐतराज हो तो बच्चे को गोद देना मना है। 
  8. दंपत्ति के मामले में उनके वैवाहिक जीवन को कम से कम दो साल पूरे होने चाहिए तब वे बच्चे को गोद लेने के लिए पात्र होंगे। 

What are the main rules for adopting a child:-

क्या हैं बच्चे को गोद लेने के प्रमुख नियमः- 

  1. उसी बच्चे को गोद दिया जा सकता है जिसे पहले गोद नो दिया गया हो। 
  2. गोद दिए जाने के समय बच्चे की उम्र 15 वर्ष से कम होना चाहिए। 
  3. अकेली महिला किसी भी लिंग के बच्चे को गोद ले सकती है। 
  4. अकेला पुरुष सिर्फ लड़के को ही गोद ले सकता है। 
  5. बच्चे की उम्र 4 साल तक की है तो गोद लेने दंपत्ति दोनों की आयु संयुक्त रुप से 90 साल हो। 
  6. सिंगल पेरेंट होने की स्थिति में अधिकतम 45 वर्ष आयु होना चाहिए। 
  7. यदि बच्चे की उम्र 4 साल से 8 साल के बीच है तो संभावित दंपत्ति की आयु संयुक्त रुप से 100 वर्ष होना चाहिए। 
  8. जेजे एक्ट के अनुसार पुरुष सिंगल परेंट्स के मामले में न्यूनतम आयु 25 वर्ष निर्धारित है तभी वे बच्चा गोद ले सकते हैं। 
  9. यदि बच्चा 8 से 15 साल के बीच का है तो दंपत्ति की आयु संयुक्त रुप से 100 साल होना चाहिए। 
  10. यदि गोद लेने वाले दंपत्ति की संयुक्त आयु 110 वर्ष से अधिक हो गई है तो वे बच्चा गोद लेने की पात्रता नहीं रखते हैं। 
  11. बच्चे को गोद लेने वाले रिश्तेदार हों तो उम्र का बंधन नहीं है।
  12. गोद देने वाले के यहां से बच्चे के सभी कानूनी अधिकार खत्म हो जाएंगे जबकि गोद लेने वाले के यहां उसे सभी कानूनी अधिकार प्राप्त होंगे। 

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